सरकारी कंपनी REC Limited के माध्यम से इस निर्गम का आकार कम से कम 5 अरब रुपये ($57 मिलियन) होगा। REC Limited ऊर्जा अवसंरचना के वित्तपोषण का काम करती है। इस पायलट परियोजना को मुंबई में होने वाले वार्षिक सितंबर फिनटेक कार्यक्रम में प्रस्तुत किया जाएगा। हालांकि, यह केवल निवेशकों के एक सीमित समूह के लिए उपलब्ध होगी। इसमें व्यापार करने के लिए दो डिजिटल खातों की आवश्यकता होगी। पहला — खरीद के लिए थोक CBDC वाला वॉलेट, और दूसरा — प्रतिभूतियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट।

टोकनाइज़्ड बॉन्ड के लिए प्रारंभिक तीन महीने की लॉक-इन अवधि तय की जाएगी। उम्मीद है कि दिसंबर तक एक्सचेंज इनके लिए एक द्वितीयक बाजार तैयार कर लेंगे। इसके अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड DEMAT 2.0 बॉन्ड्स के लिए एक अलग डिजिटल वॉलेट बना रहे हैं।